भारतीय इतिहास में सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक भाषण कौन सा है?

भारतीय इतिहास में सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक भाषण कौन सा है?

प्रत्येक समाज में प्रतिनिधित्व अपरिहार्य है। राजपाट हो, अध्यात्म हो, मनोरंजन हो, युद्ध हो या फिर क्रीड़ा जगत ही क्यों न हो हर क्षेत्र की विशिष्टता को उसका प्रमुख प्रतिनिधि ही जनसामान्य के समक्ष प्रतिबिंबित करता है। राजनीतिक दृष्टिकोण से देखेंगे तो किसी प्रान्त की गरिमा और उसकी अंतर्देशीय छवि का अंदाजा आप वहां के प्रतिनिधि के वक्तव्य से लगा सकते हैं, क्योंकि असली सामर्थ्य शस्त्रों में नहीं बल्कि ‘शब्दों’ में होता है। अतएव आपको भी ऐसे भाषणों के बारे में अवश्य जानना चाहिए, जो भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं।
1. स्वामी विवेकानंद जी का शिकागो धर्मं सम्मलेन में दिया गया महान वक्तव्य जिसने सही मायने में न केवल अध्यात्म में बल्कि ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में भारत की महानता और सर्वोच्चता को विश्व के सामने बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
2. स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है,पंडित बालगंगाधर तिलक ने इस सुप्रसिद्ध नारे को अंग्रेजों की 6 साल की कैद से निकलने के बाद एक ओजस्वी व्याख्यान में दिया था।
3. 23 जनवरी 1957 को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद् के सामने कश्मीर मुद्दे पर भारत का पक्ष रखते हुए रक्षा मंत्री वी.के.कृष्णमेनन ने सबसे लम्बा भाषण दिया, जिसका हवाला आज भी भारतीय कूटनीतिज्ञ दिया करते हैं।
4. भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 1977 में संयुक्त राष्ट्र संघ में ‘हिंदी’ में दिए गए भाषण ने अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर भारतीय राष्ट्रभाषा को गौरव दिलाने में अहम् भूमिका निभाई|

5. “तुम मुझे खून दो मै तुम्हे आजादी दूंगा” भारतीय स्वाधीनता संग्राम में महात्मा गांधी के बाद यदि किसी व्यक्ति ने भारतीय अवचेतन पर प्रभाव डाला था, वो थे सुभाष चन्द्र बोस। उनके द्वारा दिया गया यह नारा एक प्रमुख भाषण का अंश है।

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